भावों से विचारनीय बातें
नव ग्रह और बारह भावों के आधार पर ही भविष्य किया जाता है
सूर्य ,चन्द्र ,मंगल,बुध,गुरु,शुक्र,शनि,राहु,केतु,
ये नव ग्रह ही अपने अनुसार पृथक -पृथक भावों में बैठकर अपना फल देते हैं
-क्रमशः -------
शनिवार, 13 मार्च 2010
सोमवार, 8 मार्च 2010
राशी स्वामी
बारह राशियों के स्वामी -
मेष वृश्चिक्योर्भौमः ,शुक्रो वृष तुलाधिपः
मिथुन कन्ययोर्बुधः ,कर्क स्वामी तु चन्द्रमा
सिह्मस्याधिपतिः सूर्यः ,जीवः धनु -मीनयोः
एवं अधिपतिः सर्वे मकरकुम्भाधिपतिः शनिः
अर्थात -
मेष - वृश्चिक स्वामी मंगल वृष तुला के शुक्र हैं
मिथुन कन्या बुध जानो कर्क स्वामी चन्द्र हैं
सिंह के रवि अधिप हैं धनु मीन गुरु को जानिए
ग्रन्थ ज्योतिष में लिखा शनि मकर कुम्भ बखानिये
राशी स्वामी
मेष ,वृश्चिक - मंगल
वृष - तुला - शुक्र
मिथुन ,कन्या - बुध
मकर , कुम्भ - शनि
सिंह - सूर्य
कर्क - चंद्रमा
मेष वृश्चिक्योर्भौमः ,शुक्रो वृष तुलाधिपः
मिथुन कन्ययोर्बुधः ,कर्क स्वामी तु चन्द्रमा
सिह्मस्याधिपतिः सूर्यः ,जीवः धनु -मीनयोः
एवं अधिपतिः सर्वे मकरकुम्भाधिपतिः शनिः
अर्थात -
मेष - वृश्चिक स्वामी मंगल वृष तुला के शुक्र हैं
मिथुन कन्या बुध जानो कर्क स्वामी चन्द्र हैं
सिंह के रवि अधिप हैं धनु मीन गुरु को जानिए
ग्रन्थ ज्योतिष में लिखा शनि मकर कुम्भ बखानिये
राशी स्वामी
मेष ,वृश्चिक - मंगल
वृष - तुला - शुक्र
मिथुन ,कन्या - बुध
मकर , कुम्भ - शनि
सिंह - सूर्य
कर्क - चंद्रमा
लेबल:
ग्रहों की राशि,
चन्द्र,
मंगल बुध गुरु शुक्र,
सूर्य,
स्वामी
द्वादश राशियाँ (बारह राशियाँ )
बारह राशियाँ
आकाश मंडल में बारह राशियाँ हैं जिन राशियों के द्वारा हम भविष्य विचार करते हैं इन्हीं राशियों का प्रभाव व्यापक रूप से मानव के ऊपर पड़ता है
ये बारह राशियाँ निम्न हैं -
१-मेष २- वृषभ ३-मिथुन ४-कर्क ५-सिंह ६-कन्या ७-तुला ८-वृश्चिक ९-धनु १०-मकर ११- कुम्भ १२-मीन
आकाश मंडल में बारह राशियाँ हैं जिन राशियों के द्वारा हम भविष्य विचार करते हैं इन्हीं राशियों का प्रभाव व्यापक रूप से मानव के ऊपर पड़ता है
ये बारह राशियाँ निम्न हैं -
१-मेष २- वृषभ ३-मिथुन ४-कर्क ५-सिंह ६-कन्या ७-तुला ८-वृश्चिक ९-धनु १०-मकर ११- कुम्भ १२-मीन
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
भाव
ग्रहके बाद हम अगले क्रम में भावों के चर्चा करते हैं
भाव बारह होते हैं
प्रथम भाव -तनु ,शरीर,
द्वितीय -धन ,परिवार
तृतीय -सहज ,पराक्रम ,
चतुर्थ -सुख,
पंचम -मित्र , विद्या ,राकी कृपा
षष्ठ - शत्रु ,रोग , मामा
सप्तम -पत्नी ,व्यापार ,
astam -mrityu
navam - bhagya
dasham -karma
yekadash - aaya
dwadash - vyaya
भाव बारह होते हैं
प्रथम भाव -तनु ,शरीर,
द्वितीय -धन ,परिवार
तृतीय -सहज ,पराक्रम ,
चतुर्थ -सुख,
पंचम -मित्र , विद्या ,राकी कृपा
षष्ठ - शत्रु ,रोग , मामा
सप्तम -पत्नी ,व्यापार ,
astam -mrityu
navam - bhagya
dasham -karma
yekadash - aaya
dwadash - vyaya
लेबल:
गृह,
ज्योतिष,
धर्म,
फलित,
भारतीय विद्या और विज्ञानं,
भाव,
भूपेंद्र पाण्डेय
ग्रह
ज्योतिष में नवग्रह होते हैं जिनके द्वारा हम भविष्यवाणी करते हैं
जिनका नाम क्रमशः सूर्य ,चन्द्र ,मंगल,बुध गुरु ,शुक्र, शनि , राहु और केतु
इनके अलावा नेप्चून हर्शल और प्लूटो ये ग्रह भी अरुण ,वरुण और यम के नाम से भारतीय ज्योतिष शास्त्र में जाने जाते हैं
जिनका नाम क्रमशः सूर्य ,चन्द्र ,मंगल,बुध गुरु ,शुक्र, शनि , राहु और केतु
इनके अलावा नेप्चून हर्शल और प्लूटो ये ग्रह भी अरुण ,वरुण और यम के नाम से भारतीय ज्योतिष शास्त्र में जाने जाते हैं
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ग्रह,
ज्योतिष,
फलित,
भारतीय विद्या और विज्ञानं,
भाव,
भूपेंद्र पाण्डेय,
मेरा कल
रविवार, 25 अक्टूबर 2009
ज्योतिष क्या है ?
ॐ शिव ॐ
ज्योतिष का अर्थ है -ज्योति अर्थात प्रकाश
इस प्रकार ज्योतिष का अर्थ प्रकाश को दिखाने वाला \ प्रकाश की तरफ प्रेरित करने वाला \सत्य का ज्ञान कराने वाला \अज्ञान के पर्दे को हटाने वाला है यह केवल व्यक्ति के भविष्य को ही नहीं बताता अपितु पुरे ब्रह्माण्ड में होने वाली घटनाओं को प्रर्दशित करता है जिससे हम सावधान हो सकें और अपना कार्य कर सकें हमारी दैनिक दिनचर्या से लेकर जीवन के प्रत्येक कार्यों में ज्योतिष मदद करता है
ज्योतिष का अर्थ है -ज्योति अर्थात प्रकाश
इस प्रकार ज्योतिष का अर्थ प्रकाश को दिखाने वाला \ प्रकाश की तरफ प्रेरित करने वाला \सत्य का ज्ञान कराने वाला \अज्ञान के पर्दे को हटाने वाला है यह केवल व्यक्ति के भविष्य को ही नहीं बताता अपितु पुरे ब्रह्माण्ड में होने वाली घटनाओं को प्रर्दशित करता है जिससे हम सावधान हो सकें और अपना कार्य कर सकें हमारी दैनिक दिनचर्या से लेकर जीवन के प्रत्येक कार्यों में ज्योतिष मदद करता है
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